Sunday, November 8, 2009

मैं और वो


-पेड़ों की उन सूखी शाखों से,
किसी पत्ते की दिखने की आश में मैं था मगन ,
मैं बैठा हुआ चुप सा था,
सूने आसमान की ओर निहारता,
आसमान की असीम गहराइयों में,
अपने आप को तलाशता,
उस शून्य में अपने आप को खंगालता,
मैं कौन हूँ  अपने  अस्तित्व को  ढूँढता,
की मैं शायद अपने आप को पहचान  लूं,
पर अफ़सोस निराशा ही हाथ लगी,
पर मैं था अनविरत उस पथ पर,
निडर होकर चलता रहा,
उस की खोज में,
देर रात तक सूखे पत्तों की खडखड़ाहट में,
हवाओं की उस शोर में किसी संगीत की तलाश में,
 
दूर गावों से कुछ हलचल हुई  ………….
मैं बाहर बरामदे में निकला की शायद कुछ,
बस इस कुछ ने फिर से निराश ही किया |

मैं था चला जा रहा अनवरत सुनसान सड़कों पर,
तभी दूर से आती किसी बस की हार्न ने ,
मुझे झकझोर कर रख दिया,
मैंने सोचा ये मुझे क्या हुआ,
लेकिन फिर सडकों की स्ट्रीट लाइट की तरफ देख,
संतोष कर लिया…… और फिर वही सवाल,
    
दूर से आम के बाग़ से खुशबू रही थी,
मंज़रियो की लेकिन कल तक वो भी बंद हो जायेगी,
खुश था वो किसान उसकी महक से
उसे क्या पता की बसंती हवा,
उसे भी उड़ा ले जायेगी,
वो सर्द रातों में ठिठुरकर रखवाली करता,
और सुबह सुबह आपने आप पर नाराज़ होता....
की आज फिर से कुछ मंज़री बसंती हवा चुरा गयी,
   
दूर में नज़र गई तो गावों  की औरतें,
कुंए से पानी लेकर रही थी,
मैं उनमे उनके बातों में,
मुझे पता नहीं क्या….
फिर भी मुस्कुरा दिया.....
ज़वाब भी शायद कुछ इस तरह ही था,
मैं हँ पड़ा,
पर ये हँसी कुछ अलग सी थी,
कुछ अलगकुछ नयी सी……
   
कुछ नए की आस में मैं कितना घूमा,
और मैं कितना गलत था,
हर किसी में कुछ छुपा होता है
जरुरत सिर्फ तलाशने -तराशने की होती है,
मैंने भी अपने आप से एक वादा किया
मैं भी बदल सकता हूँ खुद को,
जब शोर  में संगीत खोज सकता.....
खुशबू को महसूस कर सकता .…
तो क्यों नहीं मैं वो सब कुछ कर सकता……

शायद मैं भूल गया था कि
मैं कौन हूँ !!!
मेरा नाम क्या है !!!!
मेरा नाम क्या है !!!!




     
© by Chandan

7 comments:

  1. Nice Imagination.........

    keep it up!

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  2. gr8 lines...feels the inner self while reading those!marvellous, pictereque.....

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  3. aapne aap ki talash....

    I like this stnza...
    ur poem has meaning bt not in proper syntax..try to do this.

    overall ur poems r really inovative...

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  4. बस ठीक है लिखते रहे अच्छा लिखने लगेंगे,

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  5. good yaar......pata nahi tha itna achha likhtey ho

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