किसी पत्ते की दिखने की आश में मैं था मगन ,
मैं बैठा हुआ चुप सा था,
अपने आप को तलाशता,
पर अफ़सोस निराशा ही हाथ लगी,
दूर गावों से कुछ हलचल हुई ………….
मैं बाहर बरामदे में निकला की शायद कुछ,
संतोष कर लिया…… और फिर वही सवाल,
मंज़रियो की लेकिन कल तक वो भी बंद हो जायेगी,
खुश था वो किसान उसकी महक से …
उसे क्या पता की बसंती हवा,
उसे भी उड़ा ले जायेगी,
वो सर्द रातों में ठिठुरकर रखवाली करता,
और सुबह सुबह आपने आप पर नाराज़ होता....
की आज फिर से कुछ मंज़री बसंती हवा चुरा गयी,
खुश था वो किसान उसकी महक से …
उसे क्या पता की बसंती हवा,
उसे भी उड़ा ले जायेगी,
वो सर्द रातों में ठिठुरकर रखवाली करता,
और सुबह सुबह आपने आप पर नाराज़ होता....
की आज फिर से कुछ मंज़री बसंती हवा चुरा गयी,
कुंए से पानी लेकर आ रही थी,
मैं उनमे उनके बातों में,
मुझे पता नहीं क्या….
फिर भी मुस्कुरा दिया.....
ज़वाब भी शायद कुछ इस तरह ही था,
मैं हँस पड़ा,
पर ये हँसी कुछ अलग सी थी,
कुछ अलग… कुछ नयी सी……
मैं उनमे उनके बातों में,
मुझे पता नहीं क्या….
फिर भी मुस्कुरा दिया.....
ज़वाब भी शायद कुछ इस तरह ही था,
मैं हँस पड़ा,
पर ये हँसी कुछ अलग सी थी,
कुछ अलग… कुछ नयी सी……
और मैं कितना गलत था,
हर किसी में कुछ छुपा होता है
जरुरत सिर्फ तलाशने -तराशने की होती है,
मैंने भी अपने आप से एक वादा किया,
मैं भी बदल सकता हूँ खुद को,
जब शोर में संगीत खोज सकता.....
खुशबू को महसूस कर सकता .…
तो क्यों नहीं मैं वो सब कुछ कर सकता……
शायद मैं भूल गया था कि
जब शोर में संगीत खोज सकता.....
खुशबू को महसूस कर सकता .…
तो क्यों नहीं मैं वो सब कुछ कर सकता……
शायद मैं भूल गया था कि
मैं कौन हूँ !!!
मेरा नाम क्या है !!!!
मेरा नाम क्या है !!!!
मेरा नाम क्या है !!!!
© by Chandan